मंगलवार, 22 जून 2021

SEO Friendly and High Quality Content कैसे लिखें ?

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बुधवार, 16 जून 2021

इस देश में रेप साबित करने के लिए भी चाहिए 4 गवाह, बदतर हालत में महिलाएं!

दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां महिलाएं अब भी बदतर हालात में रह रही हैं. इन्‍हीं में से एक देश है सऊदी अरब. यहां महिलाओं को कई बेसिक अधिकार तक हासिल नहीं हैं. यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तब उछला, जब वहां महिलाओं के हक के लिए गर्ल्स काउंसिल का गठन किया गया. पर काउंसिल की पहली पहली मीटिंग में ही महिलाओं को साथ नहीं बैठाया गया. 





वहां महिलाओं की हालत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं उन्‍हें घर से अकेले निकलने तक पर पाबंदी है. जानिए वहां के ऐसे नियम, जिनकी आप कल्‍पना तक नहीं कर सकते.

1. बिना दो पुरुष गवाहों के कोई भी महिला प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकती. मजेदार बात तो ये है कि पुरुष गवाह के बिना महिलाओं की पहचान की पुष्टि नहीं होती है. यही नहीं, जो दो पुरुष महिला की पुष्टि करने आते हैं उनकी विश्वसनीयता की पुष्टि करने के लिए भी चार और पुरुष गवाहों की जरूरत होती है.

2. यहां महिलाएं, स्‍पोर्ट्स में हिस्‍सा नहीं लेतीं. अगर कोई ऐसा करे तो लोगों का गुस्‍सा फूट पड़ता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि 2012 के ओलंपिक गेम्स में पहली बार सऊदी अरब की महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. लेकिन इसके बाद देश में काफी विरोध हुआ था. पूरी दुनिया ने देखा था कि उस समय फीमेल एथलीट्स ओलिंपिक में पूरे शरीर को कपड़ों से ढके हुए और हिजाब में दौड़ती नजर आई थीं. 



3. कई बार यह कहा जाता है कि सऊदी अरब में रेप करने वालों के खिलाफ सख्‍त कानून है. पर सच्‍चाई ये है कि यहां रेप बड़ी संख्‍या में होते हैं. शायद आपको ये पता नहीं होगा कि यहां पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाने को रेप नहीं माना जाता. दूसरी रेप की घटनाओं में किसी आरोपी को तब तक सजा नहीं दी जा सकती, जब तक रेप के चार चश्मदीद ना हों. इसलिए वहां रेप साबित करना एक मुश्किल काम है. कुछ मामले तो ऐसे भी देखे गए हैं कि अगर महिला का रेप हो और उस समय वह अकेली घर से निकली हो या उसके साथ कोई पुरुष गार्जियन ना हो, तो उसे भी सजा दी जाती है. 



4. वहां महिलाएं अकेले सफर नहीं कर सकतीं. उनके साथ किसी पुरुष गार्जियन का होना आवश्‍यक है. यही नहीं, महिलाओं को सफर करने के लिए पुरुष की सहमति की आवश्‍यकता होती है. हालत ये हैं कि अगर किसी महिला का पति जीवित नहीं है तो उसे अपने बेटे से लिखित अनुमति लेनी होती है.

5. सउदी में हर महिला का कोई ना कोई पुरुष गार्जियन होना आवश्‍यक है. वो चाहे उसका पिता हो, या अंकल, भाई, बेटा.

6. इतना सब होने के बावजूद वहां महिलाएं पढ़ाई के मामले में पुरुषों से आगे हैं. लेकिन नौकरी में इनकी संख्या बहुत कम है.

7. सऊदी अरब में महिलाओं की ड्राइविंग को लेकर कोई नियम नहीं है लेकिन वहां इसे अच्‍छा नहीं माना जाता. कई विरोध प्रदर्शनों के बाद अब महिलाओं को केवल बच्चों को स्कूल छोड़ने और परिवार के किसी सदस्‍या को अस्पताल पहुंचाने के लिए ड्राइव करने का अधिकार मिल गया है.

इंसानी मांस खाने का शौकीन था ये राष्ट्रपति! इसके 'फ्रिज से मिले थे ढ़ेर सारे इंसानी सिर'

अमीन ने अपने पैलेस की तकरीबन सभी खूबसूरत लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। कहा जाता है कि अमीन इंसानों का मांस खाने का शौकीन था और इसके सबूत भी मिले थे, उसके फ्रिज से बहुत सारे इंसानों के सिर बरामद हुए थे।



युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन को बेहद क्रूर शासक के तौर पर याद किया जाता है। इस शख्स ने 8 वर्ष तक राष्ट्रपति के तौर पर राज किया और लोगों पर इतने जुल्म किये कि सुनने वालों की रूह भी कांप जाये। इस शख्स ने सत्ता के लिए युगांडा के 1 लाख से ज्यादा निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतारा था।  क्रूर शासक ने अपने पैलेस की तकरीबन सभी खूबसूरत लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। कहा जाता है कि अमीन इंसानों का मांस खाने का शौकीन था और इसके सबूत भी मिले थे। उसके फ्रिज से बहुत सारे इंसानों के सिर बरामद हुए थे। 

अमीन को इन नामो से भी जाना जाता है...
अमीन का जन्म 1925 में कोबोको में हुआ था। ईदी अमीन को “अमीन दादा ” , “बुचर ऑफ़ अफ्रीका ” और “ब्रिटिश साम्राज्य के विजेता” जैसे नामो से पुकारा जाता रहा है जो कि उसकी तानशाही को प्रमाणित करते है। इसके पीछे जायज वजह भी थी। अमीन आमतौर पर लोगों की हत्या के लिए हथियारों की इस्तेमाल नहीं करता था। उसने कुछ को जिंदा जमीन में गड़वा दिया और कुछ बचे लोगों को अपने भूखे मगरमच्छों को खिला दिया। अमीन ने युगांडा पर करीब आठ साल तक राज किया और लोगों पर जमकर जुल्म ढाया। 

अमीन की 8 साल की तानाशाही का अंत ऐसे हुआ...
1979 में जब तंजानिया और अमीन विरोधी युगांडा सेना ने धावा बोला, तब अमीन की आठ साल की तानाशाही का अंत हुआ। हालांकि, इससे पहले अक्टूबर 1978 में अमीन ने तंजानिया पर असफल हमले की कोशिश की थी। अमीन ने देश छोड़ने के बाद कुछ समय लीबिया में शरण ली। फिर वो सऊदी अरब में बस गया जहां 16 अगस्त, 2003 को अमीन की मौत हुई।

अफोर्डेबेल हाउसिंग स्कीम के लिए लैंड बैंक तैयार करने में जुटी मोदी सरकार

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सभी सरकारी विभागों को गैर-उपयोगी जमीन की पहचान करने को कहा गया है। खासतौर पर विकसित सरकारी कॉलोनियों में इन जमीनों की तलाश करने को कहा गया है ताकि अफोर्डेबल हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स की योजना तैयार की जा सके। 



2022 तक सभी को घर देने के वादे पर अमल को अगले आम चुनाव में बीजेपी अपनी जीत का मंत्र मानकर चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीमों को गति देने के लिए लैंड बैंक तैयार करना चाहती है। राज्य सरकारों को जमीन की कमी के चलते हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स की योजना बनाने में मुश्किलें आ रही हैं।

इस प्रयास के जरिए पीएमओ को उम्मीद है कि जमीनों की तलाश की जा सकेगी और फिर राज्य सरकार से कहा जाएगा कि वे इन जमीनों की उपलब्धता को लेकर प्रस्ताव भेजें। एक सीनियर सरकारी अफसर ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'पूरी प्रगति पर पीएमओ बारीकी से नजर रख रहा है। हमारा अनुभव है कि कुछ राज्य दूसरों की तुलना में बेहतर कर रहे हैं। उन्होंने लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली है और भूमि की उपलब्धता को लेकर भी वहां कोई समस्या नहीं है। इसलिए अब सभी मंत्रालयों को आदेश दिए हैं कि वे एक लिस्ट तैयार करें कि किन कॉलोनियों में नए घरों का निर्माण किया जा सकता है।'

शहरी विकास मंत्रालय ने विकसित सरकारी कॉलोनियों में जमीनों का चुनाव शुरू कर दिया है। इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं और मंजूरी में किसी तरह की समस्या आड़े नहीं आएगी। अब तक केंद्र सरकार ने 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 90,000 करोड़ रुपये के हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी है।

निधि शर्मा, नई दिल्ली

मुंडेश्वरी मंदिर: जहां बकरे की दी जाती है बलि, मगर नहीं होती उसकी मौत

बिहार के कैमूर जिले में मां मुंडेश्वरी का एक अनोखा मंदिर है. यहां बकरे की बलि दी जाती है लेकिन उसकी मौत नहीं होती. भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक मां मुंडेश्वरी का मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में कैमूर पर्वतश्रेणी की पवरा पहाड़ी पर 608 फीट ऊंचाई पर स्थित है. माना जाता है की ये मंदिर मां का सबसे पुराना मंदिर है.


108 ईसवी में बना था मंदिर

ये मंदिर बहुत प्राचीन है. माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 108 ईस्वी में हुआ था. हालांकि इस मंदिर के निर्माण को लेकर बहुत सारी मान्यताएं है. लेकिन मंदिर में लगे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के सूचनापट्ट से यह जानकारी मिलती है कि यह मंदिर 635 ईसवी से पूर्व अस्तित्व में था.

मंदिर परिसर में मौजूद शिलालेखों से इसकी ऐतिहासिकता सिद्ध होती है. इस मंदिर का उल्लेख प्रसिद्ध पुरातत्वविद कनिंघम की पुस्तक में भी है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का पता तब चला, जब कुछ गड़रिये पहाड़ी के ऊपर गए और मंदिर के स्वरूप को देखा. यह मंदिर अष्टकोणीय है. मंदिर में मां मुंडेश्वरी की एक मूर्ति है और मूर्ति के सामने मुख्य द्वार की ओर एक प्राचीन शिवलिंग है.

बकरे की बलि की अनूठी प्रक्रिया



वैसे तो देवी मां के हर शक्तिपीठ की अपनी एक अलग पहचान है . मगर मां मुंडेश्वरी के मंदिर में कुछ ऐसा घटित होता है जिसपर किसी को सहज ही विश्वास नहीं होता.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंदिर में बकरे की बलि की प्रक्रिया बहुत अनूठी है. कहा जाता है की मंदिर में बकरे की बलि नहीं दी जाती. यहां बकरे को देवी के सामने लाया जाता है, जिस पर पुरोहित मंत्र वाले चावल छिड़कता है. जिससे वह बेहोश हो जाता है. फिर उसे बाहर छोड़ दिया जाता है.

कैसे पहुंचे

मुंडेश्वरी धाम पहुंचने के लिए मंदिर के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भभुआ रोड (मोहनिया) है. यह मुगलसराय-गया रेलखंड लाइन पर है. मंदिर स्टेशन से करीब 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. मोहनिया से सड़क मार्ग से आप आसानी से मुंडेश्वरी धाम पहुंच सकते हैं.

पहले मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन था. लेकिन अब पहाड़ी के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ को काट कर सीढ़ियां व रेलिंग युक्त सड़क बनाई गई है. सड़क से कार, जीप या बाइक से पहाड़ के ऊपर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.

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