शनिवार, 29 मई 2021

Black Fungus क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज



ब्लैक फंगस एक बेहद खतरनाक इंफेक्शन है जो अब तक बेहद कम लोगों को होता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसने कोविड-19 के मरीजों को तेजी से शिकार बनाया है. डॉक्टरों ने बताया कि ब्लैक फंगस (Mucormycosis) वातावरण में मौजूद है. खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है. यह स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर यह अटैक नहीं कर पाता है और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है उन्हें यह अपना शिकार बनाता है. 


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यह इतना खतरनाक संक्रमण है कि इसके शिकार करीब (50 - 80 %) आधे लोगों की जान चली जाती है. कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें मरीजों को बचाने के लिए उनकी आंखें तक निकालनी पड़ी हैं. ब्लैक फंगस के सबसे अधिक मामले डायबिटिक लोगों में आ रहे हैं. ऐसे में इन्हें सबसे अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है और नियमित तौर पर अपना शुगर लेवल चेक करते रहना चाहिए.

Mucormycosis (Black Fungus) म्यूकोरमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस क्या है?

ब्लैक फंगस का मेडिकल नाम म्यूकॉरमायकोसिस है। जो कि एक दुर्लभ व खतरनाक फंगल संक्रमण है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन वातावरण, मिट्टी जैसी जगहों में मौजूद म्यूकॉर्मिसेट्स नामक सूक्ष्मजीवों की चपेट में आने से होता है। इन सूक्ष्मजीवों के सांस द्वारा अंदर लेने या स्किन कॉन्टैक्ट में आने की आशंका होती है। यह संक्रमण अक्सर शरीर में साइनस, फेफड़े, त्वचा और दिमाग पर हमला करता है।

कोरोना और ब्लैक फंगस (Black Fungus and Corona Virus) में क्या है रिश्ता?


वैसे, तो हमारा इम्यून सिस्टम (यानी संक्रमण व रोगों के खिलाफ लड़ने की क्षमता) ब्लैक फंगस यानी (म्यूकॉरमायकोसिस) के खिलाफ लड़ने में सक्षम होता है। लेकिन, कोविड-19 (कोरोनावायरस) हमारे इम्यून सिस्टम  को बेहद कमजोर कर देता है। इसके साथ ही कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयां व स्टेरॉयड भी इम्यून सिस्टम पर असर डाल सकते हैं। इन प्रभावों से कोरोना के मरीज का इम्यून सिस्टम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसी कारण, कोविड-19 के मरीज का इम्यून सिस्टम ब्लैक फंगस के कारक सूक्ष्मजीवों (म्यूकॉर्मिसेट्स) के खिलाफ लड़ नहीं पाता।

किसे हो सकता है ब्लैक फंगस (Back Fungus)

  • डायबिटिज के मरीज जिन्हें स्टेरॉयड दिया जा रहा है.
  • कैंसर का इलाज करा रहे मरीज.
  • अधिक मात्रा में स्टेरॉयड लेने वाले मरीज.
  • ऐसे कोरोना संक्रमित जो ऑक्सीजन मॉस्क या वेंटिलेटर के जरिए ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं.
  • ऐसे मरीज जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम है.
  • ऐसे मरीज जिनके किसी ऑर्गन का ट्रांसप्लांट हुआ हो.
  • जो एचआईवी या एड्स से ग्रसित हैं 
  • जिनमें पोषण की कमी है
  • जिनमें व्हाइट ब्लड सेल की कमी है 
  • प्रीमैच्योर बर्थ, आदि

मधुमेह के रोगी, कोविड रोगी और स्टेरॉयड पर रहने वाले लोगों को ब्लैक फंगस संक्रमण होने का अधिक खतरा होता है.

आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय की एक एडवाइजरी में कहा गया है कि इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में अनियंत्रित डायबिटीज, स्टेरॉयड द्वारा इम्यूनोसप्रेशन, लंबे समय तक आईसीयू में रहना, घातकता और वोरिकोनाज़ोल थेरेपी शामिल हैं.

ब्लैक फंगस के लक्षण 

  • नाक बंद होना या नाक से खून या काला-सा कुछ निकलना.
  • गाल की हड्डियों में दर्द होना, एक तरफ चेहरे में दर्द, सुन्न या सूजन होना.
  • नाक की ऊपरी सतह का काला होना.
  • दांत ढीले होना.
  • आंखों में दर्द होना, धुंधला दिखना या दोहरा दिखना. आंखों के आस-पास सूजन होना.
  • थ्रांबोसिस, नेक्रोटिक घाव
  • सीने में दर्द या सांस लेने में दिक्कत होना.
  • उल्टी आना
  • साइनस कंजेशन
  • मल में खून आना
  • पेट में दर्द
  • डायरिया
  • शरीर पर कुछ जगह लालिमा, छाले या सूजन आना

ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस मुख्य रूप से कोविड-19 से उबरने वाले लोगों को प्रभावित कर रहा है. संक्रमण के कारण नाक का काला पड़ना या उसका रंग फीका पड़ना, धुंधली या दोहरी दृष्टि, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और खांसी से खून आना हो रहा है. म्यूकरमाइकोसिस में मुख्य रूप से साइनस, आंख शामिल होती है और कभी-कभी यह मस्तिष्क तक जा सकती है और इसमें नाक शामिल हो सकती है.

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने 'म्यूकरमाइकोसिस - इफ अनकेयर्ड फॉर - मे टर्न फेटल' शीर्षक से एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बीमारी के चेतावनी संकेत जैसे आंखों या नाक के आसपास दर्द और लाली, बुखार, सिरदर्द, खांसी और उल्टी के साथ सांस की तकलीफ के बारे में बताया गया है.

एडवाइजरी में कहा गया है कि नाक बंद होना, चेहरे का एकतरफा दर्द, सुन्न होना, नाक या तालु के ऊपर कालापन आना, दांत दर्द, दांतों का ढीला होना, धुंधली दृष्टि के साथ सीने में दर्द और सांस संबंधी लक्षणों का बिगड़ना म्यूकरमाइकोसिस से संक्रमित होने के संदिग्ध लक्षण हैं.

ब्लैक फंगस को रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, चूंकि लोग पर्यावरण में फंगल बीजाणुओं के संपर्क में आने से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं, इसलिए लोगों को मिट्टी, खाद और मलमूत्र के अलावा सड़ी हुई रोटी, फल और सब्जियों के संपर्क में आने के प्रति आगाह किया गया है. 

“मिट्टी की बागवानी को संभालते समय जूते, लंबी पतलून, लंबी बाजू की शर्ट और दस्ताने पहनें. लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए और नहाते समय पूरी तरह से स्क्रब करने की सलाह दी जाती है."

लगातार सिर दर्द होना- कोरोना से रिकवरी के दौरान अगर आपके सिर में लगातार दर्द बना रहता है। और आपको एक तरह का दबाव महसूस होता है तो ये ब्लैक फंगस का सबसे शुरुआती लक्षण हो सकता है। फंगस नाक के जरिये दिमाग तक पहुंच सकता है। 

चेहरे पर एक तरफ सूजन- हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लैक फंगस की वजह से शरीर में कुछ अलग-अलग लक्षण देखने को मिल सकते हैं। जैसे कि चेहरे के एक तरफ सूजन, दर्द और नीचे की तरफ भारीपन महसूस हो सकता है। नेक्रोसिस की वजह से स्किन लाल हो सकती है। इसे भी ब्लैक फंगस के एक लक्षण के रूप में देखा जाना चाहिए।

ब्लैक फंगस के एक लक्षणों में चेहरे की विकृति भी शामिल है। नाक के चारों ओर काली पपड़ी बनना, चेहरे का रंग खराब होना, आंखों में भारीपन महसूस होना शरीर में ब्लैक फंगस फैलने का संकेत हो सकता है। ऐसा कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


ब्लैक फंगस की जांच (Diagnosis of Black Fungus)

ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमायकोसिस) का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके शरीर का फिजिकल एग्जामिनेशन कर सकता है। इसके अलावा, वह आपके नाक व गले से नमूने लेकर जांच करवा सकता है। संक्रमित जगह से टिश्यू बायोप्सी करके भी इस संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। जरूरत होने पर एक्सरे, सीटी स्कैन व एमआरआई भी किया जा सकता है। जिससे यह पता लगाया जा सके कि फंगल इंफेक्शन शरीर के किस-किस भाग तक पहुंच गया है।


म्यूकॉरमायकोसिस व ब्लैक फंगस का इलाज (Black Fungus Treatment)

म्यूकॉरमायकोसिस का पता लगते ही आपको जल्द से जल्द इसका इलाज शुरू कर देना चाहिए। जिससे शरीर में संक्रमण को तुरंत खत्म या नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए आपको डॉक्टर एंफोटेरिसिन-बी (Amphotericin B), पोसाकोनाजोल (Posaconazole) जैसी कुछ एंटीफंगल ड्रग्स को आईवी या गोली के द्वारा लेने की सलाद दे सकता है। कुछ गंभीर मामलों में संक्रमित क्षेत्रों से सर्जरी के द्वारा टिश्यू हटाए जाते हैं, ताकि यह दूसरे क्षेत्रों तक न फैले।

क्या ब्लैक फंगस का बचाव किया जा सकता है? (Black Fungus Prevention)

ब्लैक फंगस को रोकने के लिए आप कुछ हद तक सावधानी बरत सकते हैं। हालांकि, फिर भी इससे बचाव का वादा नहीं किया जा सकता। आइए, इन एहतियात को जानते हैं।


1. धूल-मिट्टी वाली जगह पर जानें से बचें व मास्क का प्रयोग करें

2. गंदे व संक्रमित पानी के संपर्क में आने से बचें

3. इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली चीजें खाएं

4. योगा व एक्सरसाइज करें


अंतिम शब्द (Final Words)

ध्यान रखें कि यह जानकारी सिर्फ जागरुकता के लिए दी गई है। किसी भी दवा का इस्तेमाल या इस बीमारी का इलाज खुद न करें। डॉक्टर से सलाह लेना ही उचित है। यह जानकारी किसी भी डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है।

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