2021-09-20

अपना Driving Training and License Center खोलकर पैसे कमाएं



अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को आरटीओ का चक्कर नहीं लगाना होगा. सरकार ने डीएल बनवाने के लिए नई तरह की व्यवस्था बनाई है. चूंकि आरटीओ कार्यालय में हर दिन सैकड़ों की संख्या में आवेदन आते हैं और हर व्यक्ति का ड्राइविंग टेस्ट लेने में लंबा समय लग जाता है. इस कारण आपकी बारी काफी देर से आती है और लाइसेंस बनने में काफी देरी होती है.


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अब प्राइवेट कंपनी भी जारी कर सकेंगी ड्राइविंग लाइसेंस

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नये दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं. केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license) बनाने को लेकर बड़ा ऐलान किया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नोटिस के मुताबिक, अब कार कंपनियां (Car Manufacturers), ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (Automobile Associations) और एनजीओ (NGO) को भी ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड लाइसेंस सेंटर खोलने की इजाजत होगी. 



ये संस्थान अपने सेंटरों में ट्रेनिंग पास कर चुके लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी भी कर सकेंगे. अब लर्निंग लाइसेंस (Learning License) के लिए भी आपको परिवहन विभाग के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लेकिन  कुछ मामलों में गाड़ियों के पंजीकरण (RC) के लिए अभी भी आपको आरटीओ ही जाना पड़ सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORTH) ने इस बारे में नोटिस जारी कर दिया है. हालांकि, रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) पहले की तरह ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते रहेंगे.


ड्राइविंग लाइसेंस सेंटर खोलने के लिए कौन - कौन  अप्लाई  कर सकता है?

पहले ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की सुविधा केवल  क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों यानि आरटीओ के पास होती थी पर नई गाइडलाइंस के अनुसार अब ये सभी संस्थाएं जैसे फर्म्स, एनजीओ, प्राइवेट कंपनियां, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन, व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, ऑटोनॉमस बॉडी, प्राइवेट व्हीकल मैन्युफैक्चरर, ये सभी अपने यहां ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड लाइसेंस सेंटर खोलने के लिए अप्लाई कर सकेंगे.


ड्राइविंग लाइसेंस सेंटर खोलने के लिए क्या जरूरी है?


जो संस्थाएं अपने यहां ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाहती हैं, इनके पास केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत निर्धारित जमीन पर जरूरी सुविधाएं जैसे क्लास रूम, सिमुलेटर और एक खास ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक होना जरूरी है. यही नहीं अगर कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में इसके लिए अप्लाई करता है, तो उसे रिसोर्स को मैनेज करने को लेकर अपनी फाइनेंशियल कैपेबिलिटी भी दिखानी होगी.


एप्लीकेशन में क्या-क्या जानकारी देनी होगी?

एप्लीकेशन में फाइनेंशियल कैपेसिटी, लीगल स्टेटस, ट्रेनिंग और टेस्टिंग के लिए कितना स्पेस है, या इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, ट्रेनिंग देने वाले ट्रेनीज, ड्राइविंग ट्रेनिंग और रोड सेफ्टी को लेकर कितना अनुभव है, कनेक्टिविटी, आम लोगों की कितनी पहुंच है और शहर से वो ट्रेनिंग सेंटर कितना दूर है, ये सभी जानकारी होनी चाहिए.

सरकार के मुताबिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोलने के प्रोसेस को अप्लाई करने के 60 दिनों के अंदर पूरा करना होगा. इन ट्रेनिंग सेंटर्स को अपनी एनुअल रिपोर्ट भी जमा करानी होगी, जिसे आरटीओ या डीटीओ में जमा कराया जा सकेगा. नए नियमों के मुताबिक, ये ट्रेनिंग सेंटर चलाने वाली संस्थाएं कॉर्पोरेट क्षेत्र से या केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के तहत या कॉर्पोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत मदद मांग सकती हैं.


एक ऑनलाइन पोर्टल भी बनाना होगा

मान्यता प्राप्त केंद्रों को ऑनलाइन पोर्टल भी बनाना होगा, जिसमें प्रशिक्षण कैलेंडर, ट्रेनिंग कोर्स स्ट्रक्चर, प्रशिक्षण घंटे और कार्य दिवसों की जानकारी देनी होगी. इस ऑनलाइन पोर्टल में प्रशिक्षण / प्रशिक्षित लोगों की लिस्ट, प्रशिक्षकों की डिटेल्स, ट्रेनिंग के नतीजे, उपलब्ध सुविधाएं, छुट्टियों की सूची, ट्रेनिंग फीस, जैसी कई जानकारी भी होनी चाहिए.

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